शेयर मार्केट में प्रवेश कैसे करें?

शेयर मार्केट में प्रवेश कैसे करें?-Articles-2

शेयर मार्केट में प्रवेश करने से पहले आपको ये जानना बहुत महत्वपूर्ण है की कंपनी के प्राइमरी मार्केट के द्वारा पैसे उठाना से लेकर सूचीबद्ध होने के बाद शेयरों की सेकंडरी मार्केट में खरीद-बिक्री की पूरी प्रक्रिया स्टॉक एक्सचेंज (stock exchange) के नियम व कानून के तहत संचालित होती है। सरकारी एजेंसी ‘सिक्यूरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) की निगरानी में सभी एक्सचेंज कार्य करते हैं।

अब यदि अपने लोगों के मुँह से शेयर मार्केट से पैसे को दो गुना-तीन गुना बनाने की कहानियाँ सुनकर आप भी शेयर बाजार में आना चाहते है और अपना इक्कठा धन लगाना चाहते हैं तो कृपया ठहर जाइए; क्योंकि आस-पास से जुटाई गई जानकारी या अपने दोस्तों के कहे अनुसार यदि आप शेयर बाजार में आये तो तो आपको भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

कुछ लोग ऐसे ही  तुरंत अपना डी-मैट अकाउंट खुलवाकर शेयर खरीद लेते है  या (IPO) आई.पी.ओ. में पैसे लगाबैठते है, और होता यह है की अपना लगाए हुए पैसे का एक-चौथाई ही उनको वापस मिल पाता है। और वो हताशा होकर अपने दैनिक काम-काज से भी हाथ धो बैठते है !

ऐसा कहकर हम आपको शेयर मार्केट के प्रति डर पैदा नहीं करना चाहते हैं और न ही उसे हौआ बनाकर आपको डरा रहे हैं। मुख्य बात यह है कि हर वह निवेशक (investor), जो शेयर बाजार में निवेश कर भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था में भागीदार होना चाहता है, वह पूरी तरह जागरूक हो।

उसे न सिर्फ शेयर मार्केट से पैसे को दोगुना कैसे किया जाता है, इसका ज्ञान हो अपितु वह शेयर बाजार के जोखिम से भी पूरी तरह अवगत हो; क्योंकि आज का भारतीय बाजार अब सट्टा बाजार नहीं है। यहाँ सभी चीजें वैज्ञानिक(scientific) तरीकों से पूरी होती हैं, भले ही वह प्राथमिक बाजार(primary market) हो या द्वितीयक बाजार (secondary market)

आपको ये जानना बहुत महत्वपूर्ण है की कंपनी के प्राइमरी मार्केट के द्वारा पैसे उठाना से लेकर सूचीबद्ध होने के बाद शेयरों की सेकंडरी मार्केट में खरीद-बिक्री की पूरी प्रक्रिया स्टॉक एक्सचेंज (stock exchange) के नियम व कानून के तहत संचालित होती है।

सरकारी एजेंसी ‘सिक्यूरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) की निगरानी में सभी एक्सचेंज कार्य करते हैं। इसलिए यदि आप शेयर बाजार की कार्य-प्रणाली को पूरी तरह समझकर अपना पैसा लगाएँगे तो यह तय है कि आप पैसा नहीं गँवाएँगे

यदि इस ज्ञान के साथ आप अपनी सूझ-बूझ का इस्तमाल करंगे तो आप शेयर बाजार से बहुत पैसा कमा सकते है औरआप हर मुश्किल का सामना कर सकेंगे। मेरा कहना है की यदि आप मन बना चुके हैं कि आपका शेयर बाजार (Share Market) में निवेश करना है तो आपको सबसे पहले अपना डी-मैट (Demat account)अकाउंट खुलवाना होगा क्योंकि अब बिना Demat account के आप शेयरों का लेन-देन नहीं कर सकते हैं।

वैसे पहले फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट के रूप में निवेशकों के पास होते थे लेकिन अब सिर्फ शेयर का लेन देन डी-मैट शेयर के रूप में हो गया है, इसलिए सबसे पहले डी-मैट अकाउंट खुलवाना अति महत्वपूर्ण कार्य है। Demat account कैसे खुलवाए? अगर आप जानना चाहते है तो comment करके पूछ सकते है. हम आपको गाइड कर देंगे।

प्राथमिक बाजार (Primary Market) क्या है?

जब कोई कंपनी अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नए शैयर या डिबेंचर जारी करके सीधे निवेशकों से धन की उगाही करती है तो ऐसा वह कंपनी प्राथमिक बाजार के तहत करती है। कंपनी नए इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) प्राथमिक बाजार में लाकर नए शेयर/डिबेंचर जारी करती है।

दूसरे शब्दों में कहें तो प्राइमरी मार्केट वह जगह है, जहाँ सिक्यूरिटीज (securities) को अस्तित्व में लाया जाता है (जैसे आई,पी, ओ.के द्वारा)। प्राथमिक बाजार के विपरीत द्वितीयक बाजार (सेकंडरी मार्केट) मैं विभिन्न कंपनियों द्वारा पहले से जारी किए गए शेयर/डिबेंचर या अन्य सिक्यूरिटीज का लेन-देन होता है।

पूँजी(capital) का क्याअर्थ है? -what is capital?

किसी भी कंपनी को अपना व्यवसाय चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है और यह धन -(पूँजी ) उस कंपनी की कैपिटल’ कहलाता है। कंपनी इसे दो प्रकार से हासिल करती है-शेयर (share) जारी करके तथा पूँजी उधार लेकर।

धन की वह अधिकतम मात्रा जो कंपनी नियमानुसार शेयर जारी करके हासिल कर सकती है, कंपनी की ऑथराइज्ड कैपिटल (अधिकृत पूँजी) कहलाती है। इस ऑथराइज्ड कैपिटल में से कंपनी शेयर जारी करके जो पूंजी हासिल करती है, वह उस कंपनी की शेयर कैपिटल कहलाती है।

कंपनी यह शेयर कैपिटल एक ही बार या विभिन्न चरणों में प्राथमिक बाजार में उतरकर, शेयर जारी करके हासिल कर सकती है। उस समय कंपनी द्वारा शेयर जारी करके जो पूंजी हासिल करती है उसे (paid up capital) कहा जाता है।

authorized capital (अधिकृत पूंजी) का वह हिस्सा, जिसे कंपनी शेयर के द्वारा धन लेकर हासिल कर चुकी है, कंपनी का इश्यूड कैपिटल(issued capital) कहलाता है। कई बार जब कंपनी नए शेयर जारी करती है तो शेयरधारकों के लिए यह अविश्यक नहीं होता कि वे शेवरों की पूरी पूँजी एक साथ चुकाएँ। इसमें शेयरों की कुल पूंजी का कुछ हिस्सा भविष्य की आवश्यकताओं के लिए कंपनी बाद में लेती है।

इस प्रकार नए जारी शेयरों की कुल पूँजी का वह हिस्सा, जो कंपनी अभी आंशिक रूप से इकक्ठा कर रही है, ओ कॉल्ड अप कैपिटल कहलाता है।

what is paid-up capital? paid-up capital (पूंजी) क्या है?

किसी कंपनी की कुल पूँजी (total capital) कई चीजों से मिलकर बनती है,जैसे कि प्रमोटरों द्वारा निवेश की गई पूँजी, लोन के द्वारा अर्जित की गई पूँजी तथा शेयर जारी करके अर्जित की गई पूँजी इत्यादि। इसमें कंपनी द्वारा शेयर जारी करके अर्जित की गई पूँजी को ‘पैडअप कैपिटल’ कहा जाता है।

कैपिटल इश्यू किसे कहते हैं? What is a Capital Issue?

जब कभी कंपनी पूँजी उगाहने के लिए शेयर जारी करती है तो उसे ‘कैपिटल इश्यू कहते हैं। यह capital issue नए इश्यू, प्रीमियम इश्यू(premium issue) या राइट इश्यू के रूप में हो सकता है।

प्रीमियता इश्यू क्या है?What is premium issue?

जब कंपनी नए शेयरों की कीमत फेस वैल्यू (face value) से ऊपर रखकर जारी करती है तो ऐसे इश्यू को ‘प्रीमियम इश्यू’ कहते हैं । शेयर की फेस वैल्यू से ऊपर रखी गई कीमत उस शेपर पर प्रीमियम कहलाती है। जैसे यदि कोई कंपनी प्राथमिक बाजार में नया पब्लिक

इश्यू लाती है तथा उसका प्राइस बैंड 75 से 85 रुपए रखती है, जबकि प्रति शेयर फेस वैल्यू 10 रुपए है। इस प्रकार, इस इश्यू में प्रति शेयर प्रीमियम 65 से 75 रुपए है। इस इश्यू में प्रति शेयर प्रीमियम का निर्धारण कई कारकों से किया जाता है, जैसे कि तत्कालीन शेयरों की बुक बैल्यू क्या है, प्रति शेयर लाभ कितना है, (ई.पी.एस. -‘अर्निंग पर शेयर) सथा गत तीन वर्षों में शेयर की औसत बाजार कीमत कितनी है इत्यादि।

what is Oversubscribed issue? Oversubscribed issue किसे कहते है?

आपने कई बार सुना होगा की इस कंपनी का  IPO Oversubscribed हो गया क्या आपको पता है की ये Oversubscribed क्या है? आइये जानते है कोई  भी कंपनी अपनी शेयर पब्लिक के लिए निर्धारित मात्रा में जारी करती है। जब इस

शेयर के लिए मिलनेवाले आवेदन पत्र कंपनी द्वारा जारी निर्धारित शेयर मात्रा से अधिक संख्या में प्राप्त होते हैं तो उसे ‘ओवर सबस्क्राइब्ड इश्यू’ कहा जाता है। ऐसी स्थिति में कंपनी एक नीति बनाकर लॉटरी सिस्टम द्वारा आवेदकों को शेयर आवंटित करती है।

जब शेयर बाजार अच्छे दौर में होता है, उस समय अच्छी व नामी कंपनियों के (IPO) पब्लिक इश्यू ओवर सबस्क्राइब्ड होते हैं। ऐसे में जो निवेशक अधिक शेयर संख्या के लिए आवेदन करते हैं, उसकी शेयर प्राप्त करने की संभावनाएँ ज्यादा होती हैं।

शेयर होल्डर किसे कहते हैं? Who are the Shareholders?

कोई भी व्यक्ति या संस्था, जिसका साधारण शेयर या प्रिफरेंस शेयर पर मालिकाना अधिकार होता है, वह ‘शेयर होल्डर’ कहलाता है। शेयरों के मालिकाना सबूत के तौर पर शेयर सर्टिफिकेट्स जारी किए जाते हैं, जो आजकल इलेक्ट्रॉनिक रूप में होते हैं।

शेयर होल्डर्स की इक्विटी क्या है? What is Shareholders’ Equity?

कंपनी में किसी भी समय उसकी कुल पूँजी में से कंपनी की सारी देनदारियाँ निकालने के पश्चात् बचा हुआ भाग शेयर होल्डर्स की इक्विटी'(equity) कहलाता है। यह भाग उस कंपनी का ‘नेट वर्थ’ होता है। इस नेट वर्थ में कंपनी द्वारा जारी किए गए कुल शेयर की फेस वैल्यू, अतिरिक्त धन, कैपिटल सरप्लस तथा अवितरित डिविडेंड शामिल होते हैं। आगे के Articles में हम जानेंगे की प्राइमरी मार्केट में कितने तरह के इश्यू है और कौन कौन से है.



 

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